क्या डिजिटल दुनिया में अपूर्ण का अर्थ ख़राब होता है?

अपनी पिछली कुछ पोस्ट में मैंने इस तथ्य को रेखांकित किया था कि बाज़ार में अपनी पहुँच और ग्राहक आधार को बढ़ाने के लिए व्यवसायों को अपनी सामग्री लोकलाइज़ क्यों करनी चाहिए?

वास्तव में ऐसा करने के बहुत से लाभ हैं। भाषा अपने लक्षित ऑडियंस के साथ जुड़ने और उनके साथ घनिष्ठता स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है।

हालाँकि, अधिकांश वेबसाइटें अपनी डिजिटल प्रॉपर्टी के लोकलाइज़ किए गए संस्करणों को नियमित रूप से अपडेट करने में विफल रहती हैं।

भारत सरकार ने यह अनिवार्य बना दिया है कि प्रत्येक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट भारतीय भाषाओं में होनी चाहिए और साथ ही इनके अंग्रेज़ी वाले संस्करण को प्राथमिक साइट बनाया जाना चाहिए। वेबसाइटों को लॉन्च करते समय आमतौर पर अंग्रेज़ी संस्करण के साथ ही साथ भारतीय भाषाओं वाले संस्करण में भी सामग्री नवीनतम होती है। हालाँकि, ,समय के साथ केवल मुख्य साइट पर अपडेट किए जाते हैं।

लोकलाइज़ किए गए संस्करण को लोग अक्सर भूल जाते हैं या उसे प्राथमिकता नहीं देते।

इसके कारण मूल डेटा और लोकलाइज़ की गई वेबसाइट के डेटा में अंतर दिखाई पड़ता है, लोकलाइज़ की गई वेबसाइट में कुछ अनुभाग और जानकारियाँ आदि नहीं होती हैं, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकता है।

कई ऐसी वेबसाइटें हैं जिनका लोकलाइज़ किया गया संस्करण उपलब्ध है, हालाँकि उनमें लेबल, मेनू आदि के लिए अंग्रेज़ी शब्दों का उपयोग हुआ है। उपयोगकर्ता अनुभव की दृष्टि से, इससे वेबसाइट प्रोफ़ेशनल नहीं लगती है और संगठन के ब्रांड की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

साथ ही, अंग्रेज़ी टेक्स्ट का दूसरी कई भाषाओं में अनुवाद करने और फिर इसे प्लैटफ़ॉर्म पर जोड़ने की पूरा प्रक्रिया काफ़ी थका देने वाली होती है। इस कारण से भी इस काम की उपेक्षा की जाती है।

हमारा समाधान – लिंग्वीफाय – आपको इस समस्या से छुटकारा दिलाता है। हमारी पेंटेंट की गई तकनीक ने स्रोत कोड को छुए बिना आपकी वेबसाइट पर डायनामिक (गतिशील) और स्टैटिक (स्थायी) डेटा का अनुवाद किया है। यह किसी भी CMS या प्लैटफ़ॉर्म के साथ काम करती है और SSO, लॉग-इन पृष्ठ, वेब UI और वेब फ़ॉर्म का भी अनुवाद करने में सक्षम है।

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